Mahabalipuram me Ghumne ki Jagah | महाबलीपुरम में घुमने की जगह

Mahabalipuram me Ghumne ki Jagah :-महाबलीपुरम, भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह समुद्र किनारे पर स्थित है और एक प्राचीन बंदरगाह शहर के इतिहास का हिस्सा भी है।

महाबलीपुरम का ऐतिहासिक और कला का धरोहर बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहाँ पर प्राचीन मंदिर, गुफाएं, चट्टानों पर खुदाई की गई छवियाँ और अन्य प्राचीन शिल्पकला के अद्वितीय नमूने हैं, जिन्होंने इस स्थल को विशेष बनाया है। महाबलीपुरम के प्रमुख आकर्षण में पंच रथ, अर्जुन के तपस्या स्थल, शोर टेम्पल, कृष्णा के मक्खन गोला, रमणुजन गुफा, और तट पर अद्भुत चट्टान फॉर्मेशन जैसे स्थल शामिल हैं.

महाबलीपुरम का समुद्र किनारा भी एक आकर्षण है और यहाँ पर सुनसान समुद्र किनारे पर सैर करना और सूरजसंक्रांति देखना अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।

इसके अलावा, महाबलीपुरम में बहुत सारे पार्यटन स्थल, अच्छे होटल, और पूरे क्षेत्र के पास पर्यटकों के आवास के विकल्प भी मौजूद हैं, जो इस स्थल को भ्रमण के लिए आकर्षक बनाते हैं।

शोर मंदिर -Shore Temple Mahabalipuram me Ghumne ki Jagah

Mahabalipuram me Ghumne ki Jagah

शोर मंदिर (Shore Temple) तमिलनाडु के महाबलिपुरम (Mahabalipuram) शहर में स्थित है और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह मंदिर UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह समुद्र किनारे पर स्थित है और इसका नाम “शोर मंदिर” इसलिए है क्योंकि यह समुद्र के किनारे पर है।

शोर मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में पल्लव वंश के राजा नरसिम्हवर्मन द्वितीय द्वारा किया गया था। यह मंदिर शिव को समर्पित है और इसमें दो मुख्य मंदिर होते हैं, जिनमें एक बड़ा मुख्य मंदिर और छोटे से मंदिर के रूप में दो शिवलिंग होते हैं।

शोर मंदिर की विशेषता उसके विशाल शिल्पकला कार्य और अत्यधिक विस्तारवाद है, जिसमें आपको पुरातात्विक विचारधारा की महत्वपूर्ण उदाहरण मिलते हैं। इसके अलावा, समुद्र किनारे पर स्थित होने के कारण, इस मंदिर से आपको सुंदर समुद्र और सूरजास्त का आनंद भी मिलता है।

यह स्थल पर्यटकों और ऐतिहासिक रुचि रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है, और आप यहाँ अपने ऐतिहासिक और धार्मिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए जा सकते हैं।

पांच रथ -Five Rathas

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पंच रथ (Pancha Rathas) एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो महाबलिपुरम, तमिलनाडु, भारत में स्थित है। यह स्थल अपने प्राचीन शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है और UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है।

पंच रथ मंदिर का नाम “पंच” (पांच) से है क्योंकि यहां पांच अलग-अलग रथों का निर्माण किया गया है, जिनके प्रत्येक का अपना अलग-अलग स्टाइल और रूप है। ये रथ एक समुदायिक पर्व में भगवान शिव, पांच पांडव, और द्रौपदी के रथ के रूप में निर्मित हैं, लेकिन इनमें कोई रथ नहीं है और वे केवल शिल्पकला के रूप में हैं।

पंच रथ मंदिर के रथों के निर्माण में गहन शिल्पकला के तकनीकों का प्रदर्शन किया गया है और इनका रूप एक प्राचीन भारतीय सस्कृति के महत्वपूर्ण हिस्से की प्रतिष्ठा करता है। इन रथों के चित्रण और शिल्पकला का मूल्यांकन करने के लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक यहां आते हैं।

तट मंदिर -Coast Temple

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महाबलिपुरम के तट (Shore) मंदिर का जिक्र आपने किया हो सकता है। तट मंदिर या शोर मंदिर (Shore Temple) महाबलिपुरम, तमिलनाडु, भारत में स्थित है और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह मंदिर UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है।

तट मंदिर का नाम “तट” (Shore) से है क्योंकि यह समुद्र किनारे पर स्थित है। यह एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है और भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण पल्लव वंश के राजा नरसिम्हवर्मन द्वितीय द्वारा 7वीं शताब्दी में किया गया था।

तट मंदिर का शिल्पकला काम और इसके भव्य स्वरूप ने इसे एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल बना दिया है। इसके अलावा, समुद्र किनारे पर स्थित होने के कारण, यह मंदिर समुद्र के साथ एक आदर्श सूरजास्त का अनुभव करने के लिए एक बेहद खास स्थल है।

अर्जुन की तपस्या-Arjun’s penance

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महाबलिपुरम (Mahabalipuram) में “अर्जुन की तपस्या” के नाम से एक प्रसिद्ध प्राचीन शिल्पकला दर्शनीय है, जिसे महाबलिपुरम के समुद्र किनारे पर स्थित है। यह एक बड़े पत्थर पर बना कला कार्य है जिसमें भगवान अर्जुन की तपस्या का चित्रण किया गया है।

अर्जुन की तपस्या का यह चित्र भगवान शिव के द्वारा ग्राहकरण (acceptance) की कथा को दरुस्तर रूप से प्रस्तुत करता है। कथा के अनुसार, अर्जुन ने भगवान शिव से ब्रह्मास्त्र का उपयोग कैसे करना है यह सिखने के लिए तपस्या की थी। उन्होंने अपनी तपस्या को इतनी गहराई से की थी कि भगवान शिव उनकी बात सुनने आए और उन्हें अपने ज्ञान का उपदेश दिया।

इस चित्र में दिखाया गया है कि अर्जुन एक पेड़ के नीचे तपस्या कर रहे हैं और भगवान शिव उनके सामने खड़े हैं। यह चित्र महाबलिपुरम के प्राचीन शिल्पकला के महत्वपूर्ण उदाहरण में से एक है और यह स्थल पर्यटकों के बीच महत्वपूर्ण है, जो इतिहास, संस्कृति और शिल्पकला के प्रति रुचि रखते हैं।

कोवलोंग बीच-Covelong Beach

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कोवलोंग बीच (Covelong Beach), जिसे कई लोग कोवलांग बीच या कोवलांग कापड़ि क्षेत्र (Covelong Kovalam) के नाम से भी जानते हैं, तमिलनाडु, भारत के महाबलिपुरम (Mahabalipuram) शहर के पास स्थित है। यह समुद्र किनारे पर एक सुंदर और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर समुद्रतट है और पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय स्थल है।

कोवलोंग बीच विशेषत:

  1. समुंदर किनारा: यह बीच समुंदर के किनारे पर स्थित है और यहाँ पर्यटक अपने समय का आनंद लेते हैं, समुंदर में स्नान करते हैं और सूरज की शानदार अस्त होने का आनंद लेते हैं।
  2. सुर्फिंग: कोवलोंग बीच पर सर्फिंग एक पॉपुलर गतिविधि है, और यहाँ सर्फिंग की व्यवसायिक पाठशालाएँ भी हैं, जहाँ आप सर्फिंग सीख सकते हैं.
  3. कोवलोंग कापड़ि प्राचीन मंदिर: बीच के पास कोवलोंग कापड़ि प्राचीन मंदिर है, जो एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
  4. विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स: कोवलोंग बीच पर विभिन्न प्रकार के वाटर स्पोर्ट्स भी उपलब्ध हैं, जैसे कि जेट स्की, बोटिंग, और जंगली बिल्डिंग।
  5. अच्छे खाने के स्थल: बीच के आस-पास अनेक रेस्तरां और खाने के स्थल हैं, जहाँ आप स्थानीय और आंतरराष्ट्रीय व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।

कोवलोंग बीच पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय गंगावन है, और यह एक सुंदर समुंदर किनारे पर अच्छे खाने, समुंदर में स्नान, और विभिन्न गतिविधियों का आनंद लेने के लिए अच्छा स्थल है।

महाबलीपुरम बीच -Mahabalipuram Beach

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महाबलीपुरम बीच (Mahabalipuram Beach) तमिलनाडु राज्य के महाबलीपुरम (Mahabalipuram) शहर में स्थित है और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। महाबलीपुरम, जिसे अब ऑल विष्णुपत्नम के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय समुद्र तट के पास स्थित है और इसकी प्राकृतिक सौंदर्यता, प्राचीन दर्शनियता, और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

महाबलीपुरम बीच के बारे में निम्नलिखित जानकारी दी जा सकती है:

  1. समुद्र किनारे की सुंदरता: महाबलीपुरम बीच समुद्र किनारे पर स्थित है और यहां पर्यटक एक शांत और सुंदर समुंदर किनारे पर घूमने का आनंद लेते हैं।
  2. रात का विचार: इस बीच पर रात का विचार बड़ा अच्छा होता है, और यह विचार विशेष रूप से समुंदर किनारे पर बैठकर चाँद और सितारों को देखने के लिए आदर्श होता है.
  3. वाटर स्पोर्ट्स: इस बीच पर विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स भी आपके आवागमन के लिए उपलब्ध हैं, जैसे कि जेट स्की और बोट राइडिंग.
  4. पर्यटन: महाबलीपुरम बीच पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय गंगावन है, और यह एक सुंदर बीच पर खाने, खेलने, और आराम करने के लिए एक अच्छा स्थल है।

टाइगर गुफा -Tiger Cave

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महाबलिपुरम (Mahabalipuram) भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है और एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। महाबलिपुरम क्षेत्र में “टाइगर केव” (Tiger Cave) एक प्राचीन गुफा है, जो किनारे पर स्थित है और समुद्र किनारे पर है।

टाइगर केव महाबलिपुरम क्षेत्र में स्थित एक छोटे से गुफा है, जिसमें प्राचीन बौद्ध मूर्तियाँ और संगठन हैं। इस गुफा का नाम उसके द्वार पर छवि के कारण “टाइगर केव” है, जिसमें एक टाइगर की छवि दिखाई देती है।

टाइगर केव के पास के तट पर आपको प्राचीन बौद्ध कला की अलग-अलग रूपरेखाएँ देखने को मिलती हैं। यहाँ पर स्थित कला के शिल्पकला का अद्वितीय उदाहरण है और इसे पर्यटकों के बीच मशहूरी हासिल है।

भारत सीशेल संग्रहालय -India Seashell Museum

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महाबलीपुरम में हाल ही में निर्मित सीशेल संग्रहालय, एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय है, जो भारत में अद्वितीय है। इस संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को विभिन्न प्रकार के समुद्री खोलों के माध्यम से शिक्षा देना है। यहाँ पर लगभग 40,000 से अधिक अनूठे और दुर्लभ सीशेल के विभिन्न प्रकार के नमूने देखने के लिए मिलते हैं। इस संग्रहालय में एक आकर्षक एक्वेरियम भी है, जिसमें विभिन्न प्रकार की समुद्री जीवों, जैसे कि मछलियाँ, झिंगरियाँ, और शार्क शामिल हैं। इस स्थल को घूमने के लिए लगभग एक या दो घंटे की आवश्यकता होती है।

कृष्णा बटर बॉल Krishna’s Butter Ball

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कृष्णा का मक्खन गोला” (Krishna’s Butter Ball) एक प्राचीन प्राकृतिक चट्टान है, जो भारत, तमिलनाडु, महाबलीपुरम (Mahabalipuram) के पास स्थित है। इस चट्टान का नाम इसके आकार की वजह से दिया गया है, जो लगभग एक मक्खन बोल की तरह है ।

कृष्णा का मक्खन गोला का नाम इसके ऐतिहासिक महत्व के कारण भी मशहूर है, जिसमें इसे भगवान श्रीकृष्ण के बचपन के दिनों में उनके मक्खन के बड़े बोल के रूप में उपयोग किया गया था. यह एक प्राचीन पर्यटन स्थल है, और इसे दर्शनीय और आकर्षक माना जाता है।

कृष्णा का मक्खन गोला एक अद्वितीय प्राकृतिक गोला है, जो बड़े चट्टान के रूप में दिखाई देता है. यह चट्टान अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रूप से उत्तान रहती है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. कृष्णा का मक्खन गोला महाबलीपुरम के पर्यटन स्थलों में से एक है और पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थल के रूप में माना जाता है।

कृष्णा गुफा मंदिर -Krishna Cave Temple

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कृष्णा गुफा मंदिर” (Krishna Cave Temple) एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है जो भारत के महाबलीपुरम (Mahabalipuram) नामक स्थल पर स्थित है। यह मंदिर एक प्राचीन गुफा में स्थित है और श्रीकृष्ण और उनकी गोपियों के बचपन के खिलवाड़ी खेल को याद दिलाने के लिए जाना जाता है।

कृष्णा गुफा मंदिर का मुख्य खासियत उसके गुफा के रूप में होने का है, जिसमें बनाया गया है। इस गुफा में भगवान कृष्ण के और उनकी साथी गोपियों के प्राचीन संदर्भों की चित्रण किया गया है। मंदिर के अंदर भगवान कृष्ण के मंदिर और उनके बचपन के खिलवाड़ी खेल भी दिखाए जाते हैं।

यह स्थल महाबलीपुरम के पर्यटन स्थलों में से एक है और पर्यटकों के बीच मशहूर है। इसके अलावा, मंदिर के आसपास कई अन्य प्राचीन मंदिर और चट्टानों के दर्शनीय स्थल भी हैं, जो इस क्षेत्र को और भी आकर्षक बनाते हैं।

मगरमच्छ बैंक -Crocodile Bank

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मगरमच्छ बैंक (Crocodile Bank) एक प्रसिद्ध क्रॉकोडाइल और पुनरुत्पादन सेंटर है, जो भारत, तमिलनाडु, ममल्लापुरम (Mahabalipuram) के पास स्थित है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य क्रॉकोडाइल्स के संरक्षण, पुनरुत्पादन और शिक्षा का प्रसार करना है।

मगरमच्छ बैंक के पास विशाल संख्या में क्रॉकोडाइल्स के पैदा होने के लिए सुरक्षित और स्वाचालित क्षेत्र है, जिसमें विभिन्न प्रकार के क्रॉकोडाइल्स को रखा जाता है, जैसे कि मगरमच्छ, बुद्धिमान क्रॉकोडाइल, और अन्य प्रजातियाँ। यह स्थल जानकारों और पर्यटकों के लिए एक अद्वितीय स्थल है, जहां वे क्रॉकोडाइल्स को देख सकते हैं और इनके जीवन के बारे में सीख सकते हैं.

मगरमच्छ बैंक में क्रॉकोडाइल्स के अलावा वहाँ पर अन्य जीवों के बारे में भी जानकारी दी जाती है, और यहाँ पर पर्यटकों के लिए शिक्षा और मनोरंजन का एक साथ अनुभव होता है। इसके अलावा, यह स्थल पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थान भी है, जो जीव विज्ञान और प्राकृतिक जीवन के बारे में ज्ञान बढ़ाता है।

महाबलीपुरम तक पहुंचने के लिए आप कुछ प्रमुख तारीखें इस्तमाल कर सकते हैं:

  • हवाई मार्ग: महाबलीपुरम के लिए सबसे आसान से आसान हवाई मार्ग है। चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (मीनमबक्कम हवाई अड्डा) महाबलीपुरम से 55 किलोमीटर दूर है। आप चेन्नई से किसी भी प्रमुख शहर से घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ान से चेन्नई आकर महाबलीपुरम तक पहुंच सकते हैं। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या प्री-बुक कैब का इस्तेमाल करके महाबलीपुरम पहुँच सकते हैं।
  • रेल मार्ग: चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन और चेन्नई एग्मोर रेलवे स्टेशन महाबलीपुरम के नज़दीक हैं। आप किसी भी प्रमुख शहर से चेन्नई आकर महाबलीपुरम पहुँच सकते हैं। चेन्नई से महाबलीपुरम तक टैक्सी या बस से पहुँच सकते हैं।
  • बस मार्ग: तमिलनाडु राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएनएसटीसी) और निजी ऑपरेटर महाबलीपुरम के लिए बस सेवाएं चलाते हैं। चेन्नई से महाबलीपुरम के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। आप चेन्नई सेंट्रल या कोयम्बेडु बस स्टैंड से बस पकड़ सकते हैं।
  • सड़क मार्ग: अगर आप अपने खुद के वाहन पर महाबलीपुरम पहुँच रहे हैं, तो आप चेन्नई से महाबलीपुरम तक NH-45 या ईस्ट कोस्ट रोड (ईसीआर) का रास्ता अपना सकते हैं। महाबलीपुरम चेन्नई से लगभाग 58 किलोमीटर दूर है।

जब आप महाबलीपुरम पहुँचते हैं, तो आप यहाँ के प्रसिद्ध स्थल जैसे कि तट मंदिर, पंच रथ, अर्जुन की तपस्या, और समुद्र तट का अन्वेषण कर सकते हैं। ये स्थल प्राचीन स्थापत्य और कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

Mahabalipur Map

FAQs

महाबलीपुरम किस लिए प्रसिद्ध है?

महाबलीपुरम अपने यूनेस्को विश्व धरोहर-सूचीबद्ध स्मारकों और रॉक-कट मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है, जो उल्लेखनीय प्राचीन भारतीय वास्तुकला और कला का प्रदर्शन करते हैं। यह शहर अपनी जटिल पत्थर की नक्काशी और मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।

महाबलीपुरम चेन्नई से कितनी दूर है?

महाबलीपुरम भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से लगभग 58 किलोमीटर (36 मील) दक्षिण में स्थित है।

महाबलीपुरम में शीर्ष पर्यटक आकर्षण क्या हैं?

महाबलीपुरम के कुछ शीर्ष पर्यटक आकर्षणों में तट मंदिर, पंच रथ (पांच रथ), अर्जुन की तपस्या, कृष्ण की बटर बॉल और समुद्र तट शामिल हैं। ये स्थल क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और संस्कृति की झलक पेश करते हैं।

महाबलीपुरम जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

महाबलीपुरम जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी तक सर्दियों के महीनों के दौरान होता है, जब मौसम सुखद होता है और शहर के बाहरी आकर्षणों को देखने के लिए उपयुक्त होता है।

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